लाइकेन सिंप्लेक्स क्रॉनिकस त्वचा की ऊपरी परत की एक क्रोनिक, खुजलीदार सूजन है जो बार-बार खुजाने से, रगड़ने से या दोनों से होता है।
लाइकेन सिंप्लेक्स क्रोनिकस में एक चक्र चलता है जिसमें खुजाने से खुजली भड़कती है, जिससे व्यक्ति और अधिक खुजाता है।
यह अधिकतर मामलों में त्वचा के ऐसे भागों को प्रभावित करता है जहां पहुंचना आसान होता है, जैसे छाती का ऊपरी भाग, बांहें, गर्दन, पैर और जननांग वाला स्थान और अक्सर त्वचा के ऐसे भागों को प्रभावित नहीं करता है जहां पहुंचना कठिन होता है, जैसे पीठ।
त्वचा पर लगाई जाने वाली कॉर्टिकोस्टेरॉइड और खुजली से राहत के उपायों से मदद मिलती है, लेकिन लोगों को त्वचा को खुजाने और रगड़ने से बचना चाहिए।
(डर्माटाईटिस का विवरण भी देखें।)
लाइकेन सिंप्लेक्स क्रोनिकस त्वचा के किसी भाग को लंबे समय तक खुजाने या रगड़ने से होता है। खुजाने से खुजली और भड़कती है, जिससे खुजली-खुजाना-खुजली का दुष्चक्र शुरू हो जाता है।
कभी-कभी व्यक्ति बिना किसी स्पष्ट कारण के खुजाना शुरू कर देता है। और कभी-कभी खुजाना किसी क्रोनिक डर्माटाईटिस या किसी अन्य समस्या के कारण शुरू होता है, लेकिन व्यक्ति खुजली का कारण खत्म हो जाने के बाद भी लंबे समय तक खुजाता रहता है। इस स्थायी खुजली में, व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र द्वारा खुजली की संवेदनाओं को महसूस करने और उन्हें प्रोसेस करने के तरीके में बदलाव शामिल हो सकते हैं।
लाइकेन सिंप्लेक्स क्रोनिकस ऐसे लोगों में अक्सर होता है जिनमें दुश्चिंता के विकार और भावनात्मक तनाव होता है। जिन लोगों को एटोपिक डर्माटाईटिस, हे बुखार और दमा होता है या जिन्हें केवल एटोपिक डर्माटाईटिस होता है उनमें खुजली होने की संभावना अधिक होने के चलते वे लाइकेन सिंप्लेक्स क्रोनिकस के प्रति विशेष रूप से असुरक्षित होते हैं।
लाइकेन सिंप्लेक्स क्रोनिकस के लक्षण
लाइकेन सिंप्लेक्स क्रोनिकस शरीर पर कहीं भी हो सकता है जिसमें गुदा (प्रूराइटिस एनाइ देखे) और जननांग (वल्वाइ यानि योनिमुख या स्क्रोटम यानि वृषणकोष का प्रूराइटस—जननांगों में खुजली देखे) शामिल हैं।
शुरुआती अवस्था में त्वचा सामान्य दिखती है, लेकिन उसमें खुजली होती है। बाद में, लंबे समय तक खुजाने और रगड़ने के कारण खुश्की, पपड़ियाँ, त्वचा का मोटा होना और गहरे रंग के चकत्ते हो जाते हैं। इस प्रक्रिया को लाइकेनिफ़िकेशन कहते हैं और इसके कारण त्वचा चमड़े जैसी दिखने लगती है।
लाइकेन सिंप्लेक्स क्रोनिकस में बार-बार रगड़ने या खुजाने के कारण आखिरकार त्वचा मोटी और चमड़े जैसी हो जाती है।
This photo shows thickened skin (lichenification), some swelling, and darkening of the skin (hyperpigmentation) of the vulva and surrounding skin. Chronic itch and repeated scratching contribute to this reaction.
Photo courtesy of Karen McKoy, MD.
लाइकेन सिंप्लेक्स क्रोनिकस का निदान
एक डॉक्टर का मूल्यांकन
कभी-कभी एक त्वचा बायोप्सी
गुदा या योनि में खुजली के मामले में, अन्य संभावित कारणों को खारिज करने के लिए जांचें
डॉक्टर शारीरिक जांच के परिणामों के आधार पर लाइकेन सिंप्लेक्स क्रोनिकस का निदान करते हैं और कभी-कभी वे त्वचा के नमूने लेकर उन्हें किसी लैबोरेटरी को भी भेजते हैं (बायोप्सी)। डॉक्टर उन किन्हीं भी संभावित, मूल एलर्जी या रोगों का पता लगाने की कोशिश करते हैं जो शुरुआती खुजली का कारण हो सकते हैं।
अगर गुदा या जननांगों के आस-पास बहुत तेज़ खुजली होती हो, तो डॉक्टर अन्य कारणों की संभावना की भी पड़ताल कर सकते हैं, जैसे
लाइकेन सिंप्लेक्स क्रोनिकस का इलाज
खुजली से राहत देने के और लोगों को खुजाना व रगड़ना रोकने में मदद देने के उपाय
कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स
एंटीहिस्टामाइंस
अगर खुजली के कारण की पहचान हो सकती हो, तो उसका इलाज किया जाता है।
प्रभावित भाग पर कोई शक्तिशाली कॉर्टिकोस्टेरॉइड ऑइंटमेंट लगाया जाता है। लोग प्रभावित भाग को रात भर के लिए प्लास्टिक रैप से ढककर कॉर्टिकोस्टेरॉइड ऑइंटमेंट के प्रभाव बढ़ा सकते हैं। बाज़ार में मिलने वाले सर्जिकल टेप उत्पाद, जिन्हें किसी कॉर्टिकोस्टेरॉइड से तर किया गया हो, खुजली और सूजन से राहत में मदद देते हैं और त्वचा को खुजाएं जाने से बचाते हैं। छोटे-छोटे भागों में, डॉक्टर खुजली रोकने के लिए त्वचा के नीचे लंबे समय तक सक्रिय रहने वाले कॉर्टिकोस्टेरॉइड इंजेक्शन लगा सकते हैं।
डॉक्टर मुंह से एंटीहिस्टामाइन दे सकते हैं। मॉइश्चुराइज़िंग एजेंट (अमोलिएंट) और कैप्सेसिन क्रीम भी प्रभावित भागों पर लगाई जा सकती है।
जब यह विकार गुदा या जननांगों के आस-पास हुआ हो, तो कॉर्टिकोस्टेरॉइड क्रीम सर्वोत्तम इलाज होती है।



