सेल्युलाइटिस, त्वचा और उसके ठीक नीचे के ऊतकों का एक फैलने वाला बैक्टीरियल संक्रमण है।
यह संक्रमण अधिकतर स्ट्रेप्टोकोकी या स्टेफिलोकोकी से होता है।
त्वचा के प्रभावित भाग पर लालिमा, दर्द, और छूने मात्र से दर्द महसूस होते हैं, त्वचा छूने में अक्सर गर्म मालूम देती है, और कुछ लोगों को बुखार, कंपकंपी, और अन्य अधिक गंभीर लक्षण भी होते हैं।
निदान डॉक्टर द्वारा मूल्यांकन पर और कभी-कभी लैबोरेटरी टेस्ट पर आधारित होती है।
संक्रमण के उपचार के लिए एंटीबायोटिक्स की ज़रूरत होती है।
(त्वचा के जीवाणु संक्रमणों का विवरण भी देखें।)
सेल्युलाइटिस के कारण
सेल्युलाइटिस आमतौर पर स्ट्रेप्टोकोकस और स्टेफ़ाइलोकोकस ऑरियस बैक्टीरिया के कारण होता है। स्ट्रेप्टोकोकी त्वचा में तेज़ी से फैलते हैं क्योंकि वे ऐसे एंज़ाइम बनाते हैं जो ऊतक की संक्रमण रोकने की क्षमता को बाधित करते हैं। स्टेफिलोकोकी के कारण होने वाला सेल्युलाइटिस आमतौर पर खुले घावों और मवाद से भरी फोड़ों (त्वचा के ऐब्सेस) में होता है।
कई अन्य बैक्टीरिया सेल्युलाइटिस का कारण बन सकते हैं। हाल ही में, स्टेफ़ाइलोकोकस का एक ऐसा स्ट्रेन, जिस पर पूर्व में प्रभावी एंटीबायोटिक्स का प्रभाव नहीं होता है, सेल्युलाइटिस का एक अधिक आम कारण बन चुका है। इस स्ट्रेन को मेथिसिलिन-प्रतिरोधी स्टेफ़ाइलोकोकस ऑरियस (MRSA) कहते हैं। किसी अस्पताल या नर्सिंग होम में इसके संपर्क में आने वाले लोगों में आम तौर पर MRSA के एक ऐसे स्ट्रेन का संक्रमण होता है, जो स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों के बाहर अधिक आम रूप से मिलने वाले MRSA के अन्य स्ट्रेन की तुलना में एंटीबायोटिक्स पर अलग ढंग से प्रतिक्रिया दे सकता है।
बैक्टीरिया आम तौर पर खरोंचों, छेदों, सर्जरी, जलने, फ़ंगल संक्रमणों (जैसे एथलीट्स फ़ुट), पशुओं के काटने, और त्वचा विकारों के कारण त्वचा में बनने वाली छोटी-छोटी दरारों से प्रवेश करते हैं। त्वचा के वे भाग विशेष रूप से असुरक्षित होते हैं जो फ़्लूड इकट्ठा होने से सूज गए हैं (एडिमा)। हालांकि, सेल्युलाइटिस ऐसी त्वचा में भी हो सकता है जो स्पष्ट रूप से चोटिल नहीं है।
कुछ खास प्रकार के बैक्टीरिया से तब सेल्युलाइटिस हो सकता है जब चोटों (जैसे कट लगना) से क्षतिग्रस्त त्वचा दूषित पानी में डुबाई जाती है।
जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर हो गई है वे ऐसे जीवाणु के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हो सकते हैं जिनसे आमतौर पर संक्रमण नहीं होते हैं।
सेल्युलाइटिस के लक्षण
सेल्युलाइटिस आमतौर पर पैरों में होता है लेकिन यह कहीं भी हो सकता है। यह आमतौर पर शरीर के केवल एक ही तरफ को प्रभावित करता है, जैसे कि एक हाथ या एक पैर।
सेल्युलाइटिस के शुरुआती लक्षण हैं प्रभावित त्वचा पर लालिमा, दर्द, और छूने मात्र से दर्द। ये लक्षण बैक्टीरिया के कारण और शरीर द्वारा संक्रमण से लड़ने की कोशिशों के कारण होते हैं। संक्रमित त्वचा गर्म हो जाती है और सूज जाती है और देखने में थोड़ी सी गड्ढेदार लग सकती है, बिल्कुल किसी संतरे के छिलके की तरह। संक्रमित त्वचा पर कभी-कभी फ़्लूड से भरे फफोले बन जाते हैं जो छोटे (वेसिकल) या बड़े (बुली) हो सकते हैं। प्रभावित भाग के किनारे स्पष्ट नहीं होते हैं, सिवाय एरिसिपलेस के मामले में, जो सेल्युलाइटिस का एक रूप है।
सेल्युलाइटिस की पहचान त्वचा पर लाल और गर्म स्थानों से होती है। कभी-कभी फफोले बन जाते हैं।
सेल्युलाइटिस की पहचान त्वचा पर लाल और गर्म स्थानों से होती है। कभी-कभी फफोले बन जाते हैं।
CDC/एलन डब्ल्यू. मैथीज
यह फ़ोटो निचले पैर की स्पष्ट लालिमा और सूजन को दिखाती है, जो सेल्युलाइटिस की विशेषता है। जांघ तक ऊपर की ओर जाने वाली लाल धारी को लिम्फैंजाइटिस (एक या अधिक लिम्फ़ैटिक वाहिकाओं का संक्रमण) कहा जाता है। एक स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर (HCP) ने पेन से दोनों संक्रमणों की सीमा पर निशान लगा दिया है ताकि यह देखा जा सके कि संक्रमण फैल रहा है या उपचार का असर हो रहा है।
यह फ़ोटो निचले पैर की स्पष्ट लालिमा और सूजन को दिखाती है, जो सेल्युलाइटिस की विशेषता है। जांघ तक ऊपर की ओर जाने वाली लाल
© स्प्रिंगर सायन्स + बिज़नेस मीडिया
यह फ़ोटो निचले पैर की लालिमा और सूजन को दिखाती है, जो सेल्युलाइटिस की विशेषता है। संक्रमण के कारण ऊपरी त्वचा छिलकर उतर गई है और ऊतक मर गए हैं।
यह फ़ोटो निचले पैर की लालिमा और सूजन को दिखाती है, जो सेल्युलाइटिस की विशेषता है। संक्रमण के कारण ऊपरी त्वचा छिलकर उतर ग
© स्प्रिंगर सायन्स + बिज़नेस मीडिया
सेल्युलाइटिस से ग्रस्त अधिकतर लोग बस थोड़ा अस्वस्थ महसूस करते हैं। कुछ को बुखार, कंपकंपी, तेज़ हृदयगति, सिरदर्द, लो ब्लड प्रेशर, और भ्रम का अनुभव हो सकता है, जो आम तौर पर गंभीर संक्रमण का संकेत है।
जैसे-जैसे जीवाणु संक्रमण फैलता है, आस-पास के लसीका ग्रंथियों का साइज़ बढ़ सकता है और उनमें छूने मात्र से दर्द हो सकता है (लिम्फ़ाडेनाइटिस), और लिम्फ़ैटिक वाहिकाओं में शोथ हो सकता है (लिंफेंजाइटिस)।
सेल्युलाइटिस का निदान
एक डॉक्टर का मूल्यांकन
कभी-कभी रक्त और ऊतक के कल्चर
डॉक्टर आम तौर पर सेल्युलाइटिस के स्वरुप और व्यक्ति के लक्षणों के आधार पर इसका निदान करते हैं।
त्वचा, रक्त, या ऊतकों के नमूनों से बैक्टीरिया की प्रयोगशाला में पहचान (जिसे कल्चर कहते हैं) आमतौर पर तब तक ज़रूरी नहीं होती है जब तक कि व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार न हो या उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर न हो, या जब तक कि एंटीबायोटिक्स दिए जाने के बाद भी संक्रमण ठीक न हो रहा हो।
कभी-कभी, डॉक्टरों को सेल्युलाइटिस और पैर की गहरी शिराओं में रक्त के क्लॉट (डीप वेन थ्रॉम्बोसिस) के बीच अंतर करने के लिए परीक्षण करने पड़ते हैं क्योंकि इन विकारों के लक्षण कुछ हद तक मिलते-जुलते हैं।
सेल्युलाइटिस का उपचार
एंटीबायोटिक्स
जो भी ऐब्सेस हों, उनमें से मवाद निकालना
एंटीबायोटिक्स के साथ शीघ्र उपचार सेल्युलाइटिस को तेजी से फैलने और रक्त तथा आंतरिक अंगों तक पहुंचने से रोक सकता है। ऐसी एंटीबायोटिक्स प्रयोग की जाती हैं जो स्ट्रेप्टोकोकी और स्टेफिलोकोकी, दोनों के विरुद्ध प्रभावी होती हैं (जैसे डाइक्लॉक्सासिलिन या सेफेलैक्सिन)।
डॉक्टर कारण के आधार पर अलग-अलग एंटीबायोटिक्स देते हैं। उदाहरण के लिए, वे उन लोगों को पेनिसिलिन देते हैं जिन्हें किसी जानवर ने काटा है और दूषित पानी के संपर्क में आने वाले लोगों को सेफाजोलिन या डॉक्सीसाइक्लिन देते हैं। यदि डॉक्टरों को MRSA संक्रमण का संदेह होता है, तो वे ट्राइमेथोप्रिम/सल्फ़ामेथॉक्साज़ोल, लिनेज़ोलिड या डॉक्सीसाइक्लिन जैसी एंटीबायोटिक्स देते हैं। ये सभी दवाएँ मुंह से (मौखिक रूप से) दी जाती हैं।
तेज़ी से फैलने वाले सेल्युलाइटिस, तेज बुखार, पुष्ट MRSA संक्रमण या गंभीर संक्रमण के अन्य लक्षणों वाले लोग या जिन्हें मुंह से ली जाने वाली एंटीबायोटिक्स से आराम नहीं मिला है, उन्हें अस्पताल में भर्ती किया जाता है और शिरा द्वारा (नस के माध्यम से) एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं।
एंटीबायोटिक्स लेने के कुछ दिनों बाद सेल्युलाइटिस के लक्षण आमतौर पर ठीक हो जाते हैं, लेकिन संक्रमण ठीक होने के बाद भी त्वचा की लालिमा बनी रह सकती है। गंभीर संक्रमण वाले लोगों में एंटीबायोटिक्स लंबे समय तक जारी रखी जा सकती हैं।
ऐब्सेस को काटकर (चीरा लगाकर) खोला जाता है और मवाद को बहा दिया जाता है।
शरीर के प्रभावित भाग को स्थिर और ऊँचा उठाकर रखा जाता है ताकि सूजन घटाने में मदद मिले। संक्रमित स्थान पर लगाई जाने वाली ठंडी, गीली पट्टियां दर्द को कम करने में मदद करती हैं। पैरों में बार-बार सेल्युलाइटिस होने की रोकथाम में कसे हुए लंबे मोज़ों से मदद मिल सकती है।
सेल्युलाइटिस ऐसे लोगों में दोबारा हो सकता है जिनमें जोखिम कारक हैं, जैसे एथलीट्स फ़ुट, मोटापा, पैर की शिराओं को नुक़सान जिससे सामान्य रक्त प्रवाह नहीं होता है (वीनस इनसफ़ीशिएंसी), सूजन (एडिमा), और अटॉपिक डर्माटाईटिस (एक्जिमा)। सेल्युलाइटिस के दोबारा होने की संभावना को घटाने के लिए डॉक्टर इन विकारों की पहचान और इलाज करते हैं।
सेल्युलाइटिस का पूर्वानुमान
सेल्युलाइटिस के अधिकतर मामले एंटीबायोटिक थेरेपी से तेज़ी से ठीक हो जाते हैं। कभी-कभी लोगों की त्वचा में ऐब्सेस हो जाते हैं। गंभीर पर दुर्लभ जटिलताओं में शामिल हैं त्वचा के गंभीर संक्रमण जो ऊतक को तेज़ी से नष्ट कर देते हैं (इन्हें त्वचा गलाने वाले संक्रमण कहते हैं) और रक्त के ज़रिए बैक्टीरिया का फैलना (बैक्टरीमिया)।
जब सेल्युलाइटिस एक ही स्थान को बार-बार प्रभावित करता है, विशेष रूप से पैर को, तो लिम्फ़ैटिक वाहिकाओं को नुक़सान हो सकता है, जिससे प्रभावित ऊतक में स्थायी सूजन आ जाती है।



