शिशु की ज़रूरतों और तत्परता पर ठोस आहार को शुरू करना निर्भर करता है। आमतौर पर, शिशुओं को उस समय ठोस आहार की आवश्यकता होती है, जब वे पर्याप्त बड़े हो जाते हैं और जब उन्हें माँ के दूध या फॉर्मूला की तुलना में कैलोरी के अधिक संकेन्द्रित स्रोत की ज़रूरत होती है। इस ज़रूरत की पहचान उस समय होती है, जब शिशु पूरी बोतल लेता है और संतुष्ट है, लेकिन 2 से 3 घंटे में उसे फिर से भूख लगने लगती है या वह हर रोज़ 40 आउंस से अधिक (लगभग 1200 मिलीलीटर्स) फ़ॉर्मूला का सेवन करने लगता है। यह विशिष्ट रूप से 4 से 6 महीने की आयु पर होता है। शिशु ठोस आहार के लिए तैयार है इसके दूसरे संकेतों में सिर और गर्दन का अच्छा नियंत्रण, सहारा देने पर सीधे बैठने की क्षमता, भोजन में रुचि, चम्मच से खाना देने पर उनका मुंह खोलना, और खाना वापस बाहर निकालने के बजाय उसे निगलना शामिल हैं। अधिकतर बच्चे 6 महीने की आयु तक इन संकेतों को दिखाना शुरू कर देते हैं।
अनेक शिशु स्तनपान या बोतल से फीडिंग करवाने के बाद ठोस आहार लेते हैं, जिससे उनकी चूसने की ज़रूरत के साथ-साथ उनकी भूख भी तुरंत खत्म हो जाती है। 4 महीने की आयु से पहले ठोस आहार देने की सिफ़ारिश नहीं की जाती है। 4 महीने से कम के शिशुओं को आहार-पोषण में ठोस आहार की आवश्यकता नहीं होती है, वे आसानी से ठोस आहार को निगल नहीं सकते, और उन्हें चम्मच के साथ या बोतल में फ़ॉर्मूला के साथ शिशु आहार को मिक्स करके जबरदस्ती फ़ीडिंग नहीं करवाई जानी चाहिए।
शिशु आहार में एकल-अनाज सीरियल्स (धान्य) (जैसे आयरन-युक्त राइस सीरियल) शामिल हो सकता है और विभिन्न प्यूरिड फल, सब्जियां और मांस शामिल हो सकता है। डॉक्टर अब यह नहीं मानते हैं कि इन खाद्य पदार्थों की शुरुआत किस क्रम से की जानी चाहिए। नया खाद्य पदार्थ शुरू करते समय, तो एक सप्ताह की अवधि के दौरान अनेक बार प्रयास करने पड़ सकते हैं जब शिशु नए आहार को पसंद करना शुरू करता है, यदि ऐसा लगता है कि शिशु किसी खास नए खाद्य पदार्थ को पसंद नहीं कर रहा है, तो माता-पिता के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे पहले या दूसरे प्रयास के बाद कोशिश करना न छोड़ें।
खाद-पदार्थ चम्मच के साथ दिए जाने चाहिए, ताकि शिशु नई फ़ीडिंग तकनीक सीख सके। 6 से 9 महीने की आयु तक, शिशु खाद्य-पदार्थ को पकड़ने में समर्थ हो जाते हैं और वे इसे अपने मुंह तक ले जाते हैं, और उन्हें खुद अपने आप खाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। प्यूरिड होम फूड वाणिज्यिक शिशु आहारों से सस्ते होते हैं और उनसे पर्याप्त आहार-पोषण मिलता है। हालांकि, गाजर, चुकंदर, शलगम, कोलार्ड ग्रीन्स और पालक से तैयार वाणिज्यिक उत्पादों को शिशुओं के लिए पसंद किया जाता है जिनकी आयु 1 वर्ष से कम की होती है, क्योंकि उनकी नाईट्रेट्स के लिए स्क्रीनिंग की जाती है। उच्च नाइट्रेट स्तर उन सब्जियों में पाया जाता है जिन्हें उर्वरक से संदूषित हो चुकी जल आपूर्तियों से उगाया जाता है, इनसे युवा बच्चों में मेथेमोग्लोबिनेमिया हो सकता है (एक ऐसा विकार ऑक्सीजन को वहन करने की शरीर की क्षमता को प्रभावित करता है)।
हालांकि शिशुओं को मीठे खाद्य पदार्थ अच्छे लगते हैं, लेकिन चीनी कोई अनिवार्य पोषक तत्व नहीं है और यदि देनी भी पड़े, तो बहुत ही कम मात्रा में दी जानी चाहिए। मीठे डेजर्ट्स शिशु आहार में शिशुओं को कोई लाभ नहीं मिलता है। जूस, आहार-पोषण का खराब स्रोत होता है, उससे कैविटीज़ बनती हैं, और इसको हर रोज़ 4 से 6 आउंस तक सीमित रखा जाना चाहिए या बिलकुल भी नहीं दिया जाना चाहिए।
वे खाद्य पदार्थ जिनसे बचा जाना चाहिए
शहद (1 वर्ष की आयु तक) क्योंकि इसमें क्लोस्ट्रीडियम बॉटुलिनम के बीजाणु होते हैं, जो बड़े बच्चों और वयस्कों के लिए हानिरहित होते हैं, लेकिन इनसे शिशुओं में बॉट्यूलिज़्म हो सकता है
ऐसे खाद्य पदार्थ जिनसे आसानी से चोकिंग हो सकती है या जिन्हें निगला जा सकता है (2 या 3 वर्ष की आयु तक), जिसमें साबुत सूखे-मेवे, हार्ड कैंडीज़, सोयाबीन, पॉपकॉर्न, हॉट-डॉग्स, मांस (जब तक कि शुद्ध किया गया न हो) तथा अंगूर (जब तक उनको बहुत ही छोटे टुकड़ों में काटा न गया हो) शामिल हैं
शिशु फूड एलर्जी विकसित कर सकते हैं। यदि थोड़ी ही समयावधि में अलग-अलग खाद्य पदार्थ दिए जाते हैं, तो यह बताना मुश्किल हो सकता है कि प्रतिक्रिया किसके कारण हुई है। इस कठिनाई के कारण, माता-पिता को एक नए, एकल-तत्व युक्त खाद्य पदार्थ को एक-एक करके शुरु करना चाहिए, और इसे 3 से 5 दिनों के अंतराल पर दिया जा सकता है। जब यह बात तय हो जाती है कि खाद्य पदार्थ सहनीय है, तो दूसरा देकर देखा जा सकता है।
ज़्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता को अपने शिशु को 4 महीने की उम्र के बाद, लेकिन जीवन के पहले वर्ष की समाप्ति से पहले, अंडा, मूँगफली का मक्खन, मछली, शेलफ़िश, स्ट्रॉबेरी और गेहूँ जैसे एलर्जी उत्पन्न करने वाले आम खाद्य पदार्थ देना शुरू कर देना चाहिए, ताकि खाद्य पदार्थों से होने वाली एलर्जी विकसित होने के जोखिम से सुरक्षा में मदद मिल सके। 4 महीने या उससे ज़्यादा की उम्र के ज़्यादातर शिशुओं के लिए, माता-पिता को किसी विशेष ठोस आहार को शुरू करने से पहले इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं होती। हालांकि, यह सुनिश्चित करने के लिए कि नया खाद्य पदार्थ शिशु के लिए सहन करने लायक है, हर 3 से 5 दिनों में सिर्फ़ 1 नया खाद्य पदार्थ ही शुरू करना चाहिए। यहाँ तक कि जिन शिशुओं को गंभीर एक्ज़िमा है, अंडे से एलर्जी है, या दोनों हैं, उन्हें भी 4 से 6 महीने की उम्र में उनकी उम्र के अनुसार उपयुक्त मूँगफली युक्त खाद्य पदार्थ देना शुरू कर देना चाहिए, ताकि मूँगफली से एलर्जी विकसित होने का जोखिम कम हो सके, बशर्ते रक्त और त्वचा की कुछ खास जाँचों के परिणाम यह दर्शाएँ कि उनके लिए ये खाद्य पदार्थ सुरक्षित हैं। माता-पिता को अपने बाल रोग चिकित्सक के साथ चर्चा करनी चाहिए उन्हें कब तथा कैसे विभिन्न ठोस आहारों को देना शुरू करना चाहिए।
1 वर्ष की आयु पर या उसके बाद, बच्चे गाय का सामान्य दूध पीना शुरु कर सकते हैं। 2 वर्ष की उम्र में बच्चे कम फैट वाला या बिना फैट वाला दूध पीना शुरू कर सकते हैं, क्योंकि तब तक उनका आहार, लगभग परिवार के अन्य सदस्यों के आहार जैसा हो जाता है। युवा बच्चों में माता-पिता को दूध सेवन को 16 से 24 आउंस तक सीमित कर देना चाहिए। ऐसे बच्चे जो बहुत अधिक दूध पीते हैं, संभवतः उन्हें अन्य महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थों से पर्याप्त पौष्टिक-तत्व नहीं मिल सकते हैं और उनमें आयरन की कमी पैदा हो सकती है।
जूस और अन्य चीनी-मिश्रित पेय, आहार-पोषण का अच्छा स्रोत नहीं होते और दाँतों में कीड़े लगने में योगदान देते हैं। 1 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को जूस नहीं देना चाहिए; 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अतिरिक्त चीनी वाले पेय (या खाद्य पदार्थ) नहीं देने चाहिए; और 2 वर्ष या उससे ज़्यादा उम्र के बच्चों में अतिरिक्त चीनी से मिलने वाली कैलोरी, कुल दैनिक कैलोरी के 10% तक ही सीमित रखनी चाहिए।
लगभग 1 वर्ष की आयु तक, आमतौर पर विकास दर धीमी हो जाती है। बच्चों को कम आहार की ज़रूरत पड़ती है और कई बार वे खाने से इंकार भी कर सकते हैं। यह निर्धारित करने के लिए कि उनका बच्चा कितना खा रहा है, माता-पिता को यह समीक्षा करनी चाहिए कि उनके बच्चे ने एक बार भोजन करते हुए या किसी एक दिन की बजाए, एक सप्ताह के दौरान कितनी मात्रा में खाद्य पदार्थों का सेवन किया है। ठोस आहार का अपर्याप्त पोषण सिर्फ़ तभी चिंता का विषय होता है, जब बच्चों की वृद्धि नियमित और स्थिर गति से नहीं होती। डॉक्टर और अन्य चिकित्सक यह सुनिश्चित करने के लिए वृद्धि चार्ट का उपयोग करते हैं कि बच्चे की वृद्धि सामान्य है।
(नवजात शिशुओं और शिशुओं की फ़ीडिंग का विवरण भी देखें।)



