माता-पिता और देखभाल करने वाले, बच्चों को उनके सबसे अच्छे संभव स्वास्थ्य को प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं। ज़िन्दगी के शुरुआती साल स्वास्थ्य और शारीरिक, मानसिक और सामाजिक/भावनात्मक विकास के लिए अहम होते हैं। अगर शिशुओं की शारीरिक ज़रूरतें नियमित तौर पर और लगातार पूरी की जाती हैं, तो बच्चे जल्द सीख जाते हैं कि उनकी देखभाल करने वाला संतुष्टि का स्रोत है, जिससे विश्वास और लगाव का एक मज़बूत नाता बनता है। सेहतमंद शिशु आगे चलकर सेहतमंद बच्चों और किशोर बन जाते हैं।
बचपन की सेहत
निवारक स्वास्थ्य देखभाल विजिट (जिन्हें वेल-चाइल्ड विजिट भी कहा जाता है) शिशुओं (शिशुओं में निवारक स्वास्थ्य देखभाल विजिट देखें), बच्चों (बच्चों में निवारक स्वास्थ्य देखभाल विजिट देखें) और किशोरों (किशोरों में निवारक स्वास्थ्य देखभाल विजिट देखें) में अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और उसे बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये विजिट नियमित टीकाकरण, अन्य निवारक स्वास्थ्य उपायों और चिकित्सा समस्याओं के आकलन के माध्यम से बीमारियों को रोकने में मदद करती हैं। विज़िट्स से माता-पिता को सवाल पूछने और अपने बच्चों को शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक रूप से बढ़ने में मदद करने के बारे में जानने का अवसर मिलता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की ब्राइट फ्यूचर्स पहल अमेरिका में प्रत्येक निवारक स्वास्थ्य देखभाल विजिट के लिए अनुशंसित विषयों और स्क्रीनिंग परीक्षणों का एक शेड्यूल प्रकाशित करती है।
बाल विकास
भावनात्मक और बौद्धिक तौर पर विकास करने के लिए, बच्चों को लगाव और स्टिम्युलेशन की ज़रूरत पड़ती है। वे माता-पिता, जो मुस्कुराते हुए चेहरे, बार-बार स्नेह भरी बातचीत, शारीरिक संपर्क और प्यार देते हैं, वे अपने बच्चे के विकास में सहायता कर रहे हैं। माता-पिता और बच्चे, दोनों के द्वारा सुखद, सकारात्मक इंटरैक्शन का आनंद लेना सबसे महत्वपूर्ण है और यह घर में खिलौनों या गैजेट्स के प्रकार या संख्या से अधिक महत्वपूर्ण है।
एक बच्चे के सर्वोत्तम विकास को बढ़ावा देना बेहतरीन होता है अगर लचीलेपन की अवधारणा को अपनाया जाए, हर एक बच्चे की उम्र, स्वभाव, विकासात्मक अवस्था और सीखने की शैली को ध्यान में रखा जाए। आमतौर पर माता-पिता, शिक्षकों और बच्चे को शामिल करने वाला एक समन्वित नजरिया सबसे अच्छा काम करता है। इन सालों के दौरान, बच्चों को एक ऐसे माहौल की ज़रूरत पड़ती है जो सारी ज़िन्दगी उन्हें जिज्ञासा और सीखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे। बच्चे को किताबें और म्यूजिक उपलब्ध कराना चाहिए। माता-पिता के साथ-साथ सवालों के जवाब देने के साथ दैनिक परस्पर संवाद के माध्यम से पढ़ने की दिनचर्या, बच्चों को ध्यान देने और समझने के साथ पढ़ने में मदद करती है और सीखने की गतिविधियों में उनकी रुचि को प्रोत्साहित करती है। स्क्रीन समय (उदाहरण के लिए, टेलीविज़न, वीडियो गेम, सेल फ़ोन और अन्य हैंडहेल्ड डिवाइस तथा गैर-शैक्षिक कंप्यूटर समय) की वजह से निष्क्रियता और मोटापा हो सकता है और बच्चे द्वारा स्क्रीन वाले डिवाइस के उपयोग में बिताए जाने वाले समय की सीमा जन्म के समय से शुरू होनी चाहिए और पूरी किशोरावस्था के समय तक बनी रहनी चाहिए।
प्लेग्रुप्स और प्रीस्कूल के बहुत से छोटे बच्चों को इससे लाभ मिलता है। बच्चे शेयरिंग जैसे अहम सोशल स्किल्स को सीख सकते हैं। इसके अतिरिक्त, हो सकता है कि वे अक्षरों, संख्याओं और रंगों को पहचानना शुरू कर दें। इन स्किल्स को सीखने से स्कूल से उनका जाना आसान हो जाता है। महत्वपूर्ण तरीके से, एक अच्छी तरह से तैयार की गई प्रीस्कूल सेटिंग में, संभावित विकासात्मक समस्याओं को पहचाना जा सकता है और जल्द ही उन पर काम किया जा सकता है।
जिन माता-पिता को चाइल्ड केयर की आवश्यकता होती है, वे सोच सकते हैं कि सबसे अच्छा माहौल क्या होता है और क्या दूसरों की देखभाल से वाकई उनके बच्चे को हानि पहुँच सकती है। उपलब्ध जानकारी से पता चलता है कि प्यार और लालन-पालन का जितना अधिक माहौल हो, उतना ही छोटे बच्चे अपने घर में और घर से बाहर की देखभाल दोनों में अच्छी तरह से रहते हैं। एक दी गई चाइल्ड केयर सेटिंग पर बच्चे की प्रतिक्रिया पर बारीकी से नज़र रखकर माता-पिता बेहतर माहौल को चुन पाते हैं। कुछ बच्चे ऐसे चाइल्ड केयर के माहौल में पलते-बढ़ते हैं जहां पर कई और भी बच्चे होते हैं, जबकि अन्य बच्चे अपने घर या छोटे समूह में बढ़िया परफॉरमेंस दे सकते हैं।
जब बच्चा स्कूल जाना शुरू करता है और उसे होमवर्क असाइनमेंट मिलता है, तो माता-पिता निम्न के द्वारा मदद कर सकते हैं:
बच्चे के काम में दिलचस्पी दिखा कर
प्रश्नों को हल करने के लिए मौजूद रह कर लेकिन काम को खुद पूरा न करें
घर पर बच्चों को काम करने के लिए एक शांत माहौल दे कर
किसी भी समस्या के बारे में शिक्षक के साथ बातचीत करना
जैसे-जैसे बच्चा एक के बाद एक अगली कक्षा में जाता जाएगा, माता-पिता को उसके लिए पढ़ाई के अलावा दूसरी गतिविधियाँ चुनते समय, उसकी ज़रूरतों पर विचार करना चाहिए। कई बच्चे इन गतिविधियों, जैसे टीम स्पोर्ट्स में खेलने या कोई म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट सीखने का अवसर मिलने पर कामयाब होते हैं। ये गतिविधियाँ सोशल स्किल्स में सुधार के लिए एक स्थान भी प्रदान कर सकती हैं। दूसरी ओर, अगर कुछ बच्चों के शेड्यूल को ज़रूरत से ज़्यादा निर्धारित कर दिया जाए और उनसे बहुत अधिक गतिविधियों में भाग लेने की उम्मीद की जाए, तो वे तनावग्रस्त हो जाते हैं। बच्चों से कल्पना से परे अपेक्षाएं रखे बिना उन्हें पाठ्येतर गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करने और सहयोग देने की ज़रूरत होती है।



