फेफड़े के विकारों के लिए चिकित्सा का इतिहास
सबसे पहले डॉक्टर व्यक्ति से लक्षणों के बारे में पूछते हैं। छाती में खिंचाव या दर्द, आराम करते समय या व्यायाम के दौरान उथली सांसें (सांस फूलना), खांसी, खांसी के साथ थूक या खांसी के साथ खून आना (हिमाप्टिसिस) और घरघराहट जैसे लक्षण, फेफड़ों या वायुमार्ग में विकार के संकेत हो सकते हैं। अधिक सामान्य लक्षण जैसे बुखार, कमज़ोरी, थकान या सामान्य रूप से बीमारी या बैचेनी महसूस होना (मेलेइस), कभी-कभी फेफड़े या हवामार्ग की बीमारियाँ भी हो सकती हैं।
डॉक्टर, व्यक्ति से इनके बारे में भी पूछते हैं:
फेफड़े संबंधी पिछली कोई बीमारी या संक्रमण
अन्य वर्तमान और पिछली चिकित्सा संबंधी समस्याएँ और उनके इलाज
रसायनों, धूल, मोल्ड या जानवरों के संपर्क में आने की जानकारी
दवाएँ
तंबाकू, दवाओं और अल्कोहल का सेवन
घर और कार्यालय का परिवेश
यात्राएँ
दिल बहलाने के लिए की गई गतिविधियाँ
डॉक्टर पूछते हैं कि परिवार के किसी सदस्य को फेफड़े या हवामार्ग संबंधी कोई बीमारी या फेफड़ों या हवामार्गों को प्रभावित करने वाले कोई अन्य बीमारी तो नहीं है (जैसे क्लॉटिंग और सूजन संबंधी सामान्य बीमारी)। डॉक्टर अन्य सामान्य लक्षणों और चिकित्सा संबंधी अन्य बीमारियों के बारे में भी पूछ सकते हैं, इनमें वे बीमारियाँ भी हो सकते हैं जो श्वसन तंत्र से संबंधित न हों।
फेफड़े के विकारों के लिए शारीरिक जांच
शारीरिक जांच के दौरान, डॉक्टर व्यक्ति का वज़न और वह कैसा दिखता है, इस बारे में जानकारी लेते हैं। फेफड़े या हवामार्ग की बीमारी की वजह से व्यक्ति का सामान्य मूड और अपने स्वास्थ्य के बारे में अच्छा महसूस करने की भावना भी प्रभावित हो सकती है, इस बारे में भी जानकारी ली जाती है।
त्वचा के रंग का आंकलन करना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि त्वचा का नीला या भूरा होकर बदरंग हो जाना (सायनोसिस) इस बात का संकेत हो सकता है कि खून में ऑक्सीजन की मात्रा पर्याप्त नहीं है। क्लबिंग (अंगुलियों के सिरों के आस-पास के हिस्से का बड़ा और गोल होना) के लिए अंगुलियों का परीक्षण किया जाता है।
बाईं ओर की क्लबिंग वाली अंगुली का सिरा, दाईं ओर की सामान्य अंगुली की तुलना में बड़ा हुआ और गोल होता है।
© स्प्रिंगर सायन्स + बिज़नेस मीडिया
डॉक्टर यह पता लगाने के लिए छाती का निरीक्षण करते हैं कि क्या छाती के आकार में असामान्यताएं हैं या नहीं, उदाहरण के लिए एक बैरल के आकार की छाती, उभरी हुई कबूतर छाती (पेक्टस कैरिनेटम), धंसी हुई या "फ़नल" छाती (पेक्टस एक्सकैवेटम)। डॉक्टर, सांस लेने की दर का निरीक्षण करते है और यह देखते हैं कि व्यक्ति सांस लेने में कितना ज़ोर लगा रहा है, और सांस लेने के लिए व्यक्ति की कौन सी स्थिति सबसे आरामदायक है।
बाईं ओर की फ़ोटो में पेक्टस एक्सकैवेटम (फ़नल छाती) वाले व्यक्ति को दिखाया गया है। दाईं ओर की फ़ोटो में पेक्टस कैरिनेटम (कबूतर छाती) वाले व्यक्ति को दिखाया गया है।
डॉ. पी. मराज़ी / SCIENCE PHOTO LIBRARY
स्टेथोस्कोप से डॉक्टर सांस लेने के दौरान आने वाली आवाज़ को सुनते हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हवा का प्रवाह सामान्य है या कहीं रुका हुआ है, फेफड़े में फ़्लूड है या नहीं या फेफड़े में से कोई असामान्य आवाज़ें तो नहीं आ रहीं।
छाती को थपथपाकर (हल्के से थप्पड़ मारने की तरह) और/या बोलने से उत्पन्न होने वाले कंपन छाती की दीवार तक कैसे पहुंचते हैं, यह महसूस करके, डॉक्टर प्रायः यह पता लगा सकते हैं कि क्या फेफड़े हवा से भरे हैं या सिकुड़ गए हैं और क्या फेफड़ों के आसपास की जगह में फ़्लूड भरा हुआ है।
छाती की जांच करते समय हो सकता है कि पूरे शरीर की शारीरिक जांच करनी पड़े, क्योंकि फेफड़े की बीमारियों की वजह से शरीर के दूसरे भाग प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही, कुछ लक्षण ऐसे भी होते हैं, जिनसे लगता है कि बीमारी फेफड़े में है, लेकिन असल में वे शरीर में किसी अन्य अंग में समस्या होने की वजह से होती हैं। उदाहरण के लिए, किडनी या हृदय में कोई असामान्यता होने पर भी सांस लेने में तकलीफ़ हो सकती है।
डॉक्टर, व्यक्ति से चलने या सीढ़ियाँ चढ़ने के लिए कह सकते हैं, ताकि उन्हें यह पता लग सके कि इनमें से किसी गतिविधि की वजह से सांस में तकलीफ़ हो रही है या नहीं। ये गतिविधियाँ पल्स ऑक्सीमेट्री पर मापते समय भी की जा सकती हैं पल्स ऑक्सीमेट्री के ज़रिए, खून में ऑक्सीज़न की मात्रा पता लगाई जाती है। पल्स ऑक्सीमेट्री से डॉक्टर को यह पता लगाने में मदद मिलती है कि खून में ऑक्सीजन की मात्रा कम है या यह किसी प्रकार का श्रम करने पर कम हो जाती है।



