आँखों की सुरक्षात्मक विशेषताएं

इनके द्वाराChristopher J. Brady, MD, Larner College of Medicine, University of Vermont
द्वारा समीक्षा की गईSunir J. Garg, MD, FACS, Thomas Jefferson University
समीक्षा की गई/बदलाव किया गया संशोधित अक्टू॰ २०२५
v797034_hi

ऑर्बिट, बरौनियाँ, पलकें, कंजंक्टाइवा, और अश्रु ग्रंथियाँ आँखों की सुरक्षा में मदद करती हैं।

आँख की रक्षा करने वाली संरचनाएं

ऑर्बिट की हड्डीदार संरचनाएं हड्डी (वह गुहा जिसमें नेत्र गोलक और उसकी मांसपेशियों, नाड़ियों, और रक्त वाहिकाओं के साथ-साथ वे संरचनाएं होती हैं जो आँसुओं का उत्पादन और निकास करती हैं) आँख की सतह से परे फैली होती हैं। वे आँख को एक विस्तृत क्षेत्र में मुक्त रूप से घूमने की अनुमति देते हुए उसकी रक्षा करती हैं।

बरौनियाँ छोटे-छोटे, मजबूत बाल हैं जो पलक के किनारे से उगते हैं। ऊपरी बरौनियाँ निचली बरौनियों से लंबी होती हैं और ऊपर की ओर उठी होती हैं। निचली बरौनियाँ नीचे की तरफ झुकी होती हैं। बरौनियाँ एक भौतिक बाधा की तरह काम करके और व्यक्ति को थोडी सी भी संवेदना या उत्तेजना पर अपने आप पलक झपकने के लिए प्रेरित करके कीड़ों और बाहरी कणों को आँखों से दूर रखती हैं।

ऊपरी और निचली पलकें त्वचा और मांसपेशी के पतले फ्लैप हैं जो आँख को ढक सकते हैं। वे अपने आप शीघ्रता से बंद होकर (झपक कर) एक यांत्रिक बाधा का निर्माण करती हैं जो बाहरी वस्तुओं, हवा, धूल, कीड़ों, और बहुत तेज प्रकाश से आँख की सुरक्षा करती है। यह अनैच्छिक क्रिया या रिफ्लेक्स किसी सामने से आ रही वस्तु के दिखने, किसी वस्तु के आँख की सतह को छूने, या बरौनियों के हवा या धूल के कणों या कीड़ों के संपर्क में आने से प्रेरित होती है।

पलक की नम पिछली सतह पर, कंजंक्टाइवा पलटती है और नेत्र गोलक की सतह को ठीक कोर्निया के सिरे तक ढकती है। कंजंक्टाइवा अपने नीचे स्थित संवेदनशील ऊतकों की सुरक्षा करती है।

झपकने के दौरान, पलकें आँसुओं को आँख की सतह के ऊपर समान रूप से फैलाती हैं। आँसू एक नमकीन तरल से बने होते हैं जो आँख की सतह को लगातार भिगो कर उसे नम बनाए रखता है और कोर्निया में ऑक्सीजन और पोषक तत्व स्थानांतरित करता है, क्योंकि उसमें वे रक्त वाहिकाएं नहीं होती हैं जो अन्य ऊतकों को इन पदार्थों की आपूर्ति करती हैं। बंद होने पर, पलकें नमी को आँख की सतह पर कैद करने में मदद करती हैं। ऊपरी और निचली पलकों के सिरों पर स्थित छोटी-छोटी ग्रंथियाँ एक तैलीय पदार्थ का स्राव करती हैं जो आँसुओं की पर्त में योगदान करता है और आँसुओं को वाष्पीकृत होने से रोकता है। आँसू आँख की सतह को नम बनाए रखते हैं। ऐसी नमी के बिना, सामान्य रूप से पारदर्शी कोर्निया शुष्क, जख्मी, संक्रमित, और अपारदर्शी बन सकती है। आँसू आँख में प्रवेश करने वाले छोटे कणों को भी रोक कर बाहर निकाल देते हैं। यही नहीं, आँसुओं में बहुत सारे एंटीबॉडी भी होते हैं जो संक्रमण की रोकथाम में मदद करते हैं। पलकें और आँसू प्रकाश की किरणों को आँख में निर्बाध प्रवेश की अनुमति देते हुए आँख की सुरक्षा करते हैं।

आँसुओं की 3 पर्तें होती हैं: पानी, म्यूकस, और तेल। लैक्रिमल (अश्रु) ग्रंथियाँ पानी वाली पर्त का उत्पादन करती हैं। प्रत्येक आँख के ऊपरी बाहरी छोर और कंजंक्टाइवा के भीतर स्थित लैक्रिमल ग्रंथियाँ (देखें चित्र आँसू कहाँ से आते हैं) आँसुओं के पानी वाले (एक्वियस) भाग का उत्पादन करती हैं, जो लैक्रिमल उत्सर्जनी नलिकाओं के माध्यम से आँख की सतह पर बहते हैं। कंजंक्टाइवा में स्थित म्यूकस ग्रंथियाँ म्यूकस का उत्पादन करती हैं, और पलक की किनारी में स्थित तेल (लिपिड) ग्रंथियाँ एक तेल का उत्पादन करती हैं। म्यूकस और तेल आँसुओं के जलीय भाग में मिश्रित होकर एक अधिक सुरक्षात्मक टियर फिल्म का निर्माण करते हैं।

प्रत्येक आँख के आँसू पलकों के नाक के करीब स्थित आंतरिक भाग में मौजूद पंक्टम नामक एक छिद्र में खाली होते हैं। फिर आँसू कैनालिकुलाई नामक महीन चैनलों में और फिर नाक में से होते हुए नेज़ोलैक्रिमल नलिकाओं में खाली होते हैं।

quizzes_lightbulb_red
अपना ज्ञान परखेंएक क्वज़ि लें!
iOS ANDROID
iOS ANDROID
iOS ANDROID