कॉन्टैक्ट डर्माटाईटिस, किसी विशेष पदार्थ से सीधे संपर्क के कारण होने वाली त्वचा की सूजन और चकत्ते हैं। दाने में खुजली हो सकती है, वह किसी स्थान विशेष तक सीमित हो सकता है और अक्सर उसके किनारे स्पष्ट होते हैं।
कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस या तो किसी उत्तेजक से या फिर किसी एलर्जिक प्रतिक्रिया से होता है।
कोई चकत्ता बनता है और उसमें खुजली, या दर्द, या दोनों हो सकते हैं।
डॉक्टर दाने के स्वरुप के आधार पर और व्यक्ति जिन पदार्थों के संपर्क में आया हो सकता है उनके इतिहास के आधार पर निदान करते हैं।
लोगों को डर्माटाईटिस पैदा करने वाले पदार्थों से बचना चाहिए या खुद को उनसे सुरक्षित रखना चाहिए।
डर्माटाईटिस के इलाज में डर्माटाईटिस पैदा करने वाला पदार्थ हटाना, खुजली से राहत के उपाय करना, त्वचा पर कॉर्टिकोस्टेरॉइड लगाना और कभी-कभी ड्रेसिंग करना शामिल होता है।
(डर्माटाईटिस का विवरण भी देखें।)
पदार्थ इन दो में से एक विधि से त्वचा में सूजन का कारण बन सकते हैं:
उत्तेजना (उत्तेजक कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस)
एलर्जिक प्रतिक्रिया (एलर्जिक कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस)
उत्तेजक कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस
इस प्रकार का डर्माटाईटिस तब होता है, जब कोई ज़हरीला या रासायानिक पदार्थ त्वचा के संपर्क में आकर त्वचा को सीधे नुकसान पहुंचाता है, जो कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस के अधिकतर मामलों में मौजूद होता है। उत्तेजक कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस में खुजली से अधिक दर्द हो सकता है।
उत्तेजक पदार्थों में शामिल हैं:
एसिड
एल्कली (जैसे नालियां साफ़ करने के रसायन)
सॉल्वेंट (जैसे नेल पॉलिश रिमूवर में मौजूद एसिटोन)
तेज़ साबुन और डिटर्जेंट
पौधे (जैसे पॉइन्सेटिया या लालपत्ता और मिर्च)
कभी-कभी शारीरिक तरल (जैसे मूत्र और लार)
इनमें से कुछ पदार्थ बहुत अधिक उत्तेजक होते हैं और कुछ मिनटों के अंदर त्वचा में बदलाव पैदा कर देते हैं, जबकि कुछ दूसरे पदार्थ कम उत्तेजक होते हैं या उन्हें अधिक लंबे संपर्क की ज़रूरत पड़ती है। यहां तक कि सौम्य साबुन और डिटर्जेंट भी बारंबार या लंबे संपर्क के बाद कुछ लोगों की त्वचा को उत्तेजित कर सकते हैं।
उत्तेजकों के प्रति अलग-अलग लोगों की त्वचा की संवेदनशीलता अलग-अलग होती है। व्यक्ति की आयु (बहुत कम या बहुत अधिक) और परिवेश (कम नमी या अधिक तापमान) वे अन्य कारक हैं जो इस बात को प्रभावित करते हैं कि उत्तेजक कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस होगा या नहीं।
लोगों को कार्यस्थल पर संपर्क में आने वाले कई पदार्थों से भी डर्माटाईटिस हो सकता है (इसे व्यवसाय-संबंधी डर्माटाईटिस कहते हैं)। यह किसी संपर्क के तुरंत बाद हो सकता है या इसे होने में लंबे समय और बार-बार संपर्क की ज़रूरत पड़ सकती है।
कभी-कभी किसी व्यक्ति के कुछ पदार्थों को छूने या निगलने के बाद उसकी त्वचा के धूप के संपर्क में आने के बाद उत्तेजक कॉन्टैक्ट डर्माटाईटिस होता है (इसे फ़ोटोटॉक्सिक कॉन्टैक्ट डर्माटाईटिस कहते हैं—रासायनिक प्रकाश संवेदनशीलता देखें)। पदार्थ चाहे छुआ गया हो या निगला गया हो, दाना धूप से संपर्क के बाद ही होता है। ऐसे पदार्थों में शामिल हैं:
कुछ परफ़्यूम
टॉपिकल बिना स्टेरॉइड वाली सूजनरोधी दवाएँ (NSAID)
कोल तार
कुछ पौधे
एलर्जिक कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस
इस प्रकार का डर्माटाईटिस, त्वचा के संपर्क में आने वाले किसी पदार्थ पर शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र द्वारा दी गई प्रतिक्रिया होती है। जब त्वचा पदार्थ से पहली बार संपर्क में आती है, तो वह उसके प्रति संवेदनशील हो जाती है। कभी-कभी व्यक्ति की त्वचा मात्र एक संपर्क से संवेदनशील बन जाती है और कभी-कभी पदार्थ से कई बार संपर्क होने के बाद। व्यक्ति की त्वचा के संवेदनशील बन जाने के बाद, अगले संपर्क से 4 से 24 घंटों के भीतर बहुत तेज़ खुजली और डर्माटाईटिस हो जाते हैं, हालांकि कुछ लोगों में 3 से 4 दिन तक प्रतिक्रिया नहीं होती है।
हज़ारों पदार्थ एलर्जिक कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस पैदा कर सकते हैं। सबसे आम में शामिल हैं इनमें पाए जाने वाले पदार्थ:
धातुएं (जैसे निकल)
प्रिज़रवेटिव
पौधे (जैसे पॉइज़न आइवी)
रबर (लेटैक्स सहित)
इत्र
निकल सल्फ़ेट अधिकांश जनसमूहों में सबसे आम कॉन्टेक्ट एलर्जिन है। यह गहनों का एक आम घटक है।
ऐसा भी संभव है कि लोग ये पदार्थ वर्षों तक बिना किसी समस्या के प्रयोग करें (या के संपर्क में आए) और उसके बाद अचानक उन्हें एलर्जिक प्रतिक्रिया हो जाए। यहां तक कि डर्माटाईटिस के इलाज के लिए प्रयोग होने वाले ऑइंटमेंट, क्रीम और लोशन भी ऐसी प्रतिक्रिया कर सकते हैं।
कभी-कभी किसी व्यक्ति के कुछ पदार्थों को छूने या निगलने के बाद उसकी त्वचा के धूप के संपर्क में आने के बाद एलर्जिक कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस होता है (इसे फोटोएलर्जिक कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस कहते हैं—रासायनिक प्रकाशसंवेदनशीलता देखे)। फोटोएलर्जिक डर्माटाईटिस में, प्रतिक्रिया त्वचा के उन भागों तक भी फैल सकती है जो धूप के संपर्क में नहीं आए थे। आम कारणों में इत्र (जैसे मस्क एंब्रेट और चंदन), एंटीसेप्टिक, NSAID और सनस्क्रीन शामिल हैं।
कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस के लक्षण
कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस का कारण या प्रकार चाहे जो हो, इससे खुजली और दाने होते हैं।
उत्तेजक कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस खुजली से ज़्यादा दर्द का कारण बनता है। लक्षणों की तीव्रता उत्तेजक पदार्थ का संपर्क खत्म हो जाने के बाद आम तौर पर 1 या 2 दिनों में घट जाती है।
एलर्जिक कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस दर्द से ज़्यादा खुजली का कारण बनता है। लक्षण महसूस होने में एक दिन या अधिक समय लग सकता है और संपर्क के 2 से 3 बाद उनकी तीव्रता घटने लगती है।
दोनों के लिए, दाने हल्के, अल्पकालिक लालिमा से लेकर गंभीर सूजन और बड़े फफोले तक भिन्न होते हैं। खुजली केवल उन स्थानों में होती है जो पदार्थ के संपर्क में आते हैं। हालांकि, दाने पहले त्वचा के पतले और संवेदनशील भागों में होते हैं, जैसे अंगुलियों के बीच और बाद में वहां जहां त्वचा मोटी होती है या ऐसी त्वचा पर जो पदार्थ के कम संपर्क में आई थी। हथेलियों और पंजों पर दानों में नन्हे फफोले हो सकते हैं।
एलर्जिक कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस में दाने आम तौर पर ऐसे पैटर्न में होते हैं जिससे पदार्थ विशेष से संपर्क का संकेत मिलता है। जैसे, पॉइज़न आइवी से त्वचा पर पतली रेखाओं जैसी धारियां बनती हैं। चकत्ते या फफोले के फ़्लूड को छूने से, दूसरे लोगों में या पदार्थ के संपर्क में नहीं आए शरीर के दूसरे भागों में कॉन्टैक्ट डर्माटाईटिस नहीं फैलता।
This photo shows allergic contact dermatitis on the forearm of a child after a temporary, black "henna" tattoo was applied.
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© Springer Science+Business Media
This photo shows redness and scaling in the web spaces between fingers.
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Photo courtesy of Thomas Ruenger, MD, PhD.
इस चित्र में एलर्जिक कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस की लालिमा, पपड़ी उतरना और सूजन देखी जा सकती है। व्यक्ति की पैच टैस्टिंग हुई थी, जिसमें जूतों के चमड़ों को डाई करने में प्रयोग होने वाली एक आम डाई, पैराफिनायलिनडायमिन के प्रति पॉजिटिव प्रतिक्रिया देखने को मिली।
इस चित्र में एलर्जिक कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस की लालिमा, पपड़ी उतरना और सूजन देखी जा सकती है। व्यक्ति की पैच टैस्टिंग हुई
फ़ोटो - कैरेन मैककोय, MD के सौजन्य से।
किसी पदार्थ विशेष के संपर्क से हुए कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस को संपर्क के स्थानों पर बने दानों से पहचाना जा सकता है। इस फोटो में, किसी पौधे (जैसे पॉइज़न आइवी या पॉइज़न सुमैक) के संपर्क के कारण बनी लंबी, सीधी धारी।
किसी पदार्थ विशेष के संपर्क से हुए कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस को संपर्क के स्थानों पर बने दानों से पहचाना जा सकता है। इस फोट
थॉमस हबीफ, MD द्वारा प्रदान की गई छवि।
कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस का निदान
डॉक्टर द्वारा मूल्यांकन और व्यक्ति का इतिहास
कभी-कभी पैच टैस्टिंग
कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस का कारण पता करना हमेशा आसान नहीं होता है। व्यक्ति के व्यवसाय, उसके शौक, घरेलू दायित्व, यात्रा, कपड़े, ऊपर से लगाए जाने वाले उत्पादों के उपयोग, कॉस्मेटिक और घर के सदस्यों की गतिविधियों पर विचार करना ज़रूरी होता है। अधिकांश लोगों को उनकी त्वचा के संपर्क में आने वाले सभी पदार्थों की जानकारी नहीं होती है।
अक्सर, शुरुआती दाने के स्थान और पैटर्न से महत्वपूर्ण संकेत मिलता है, विशेष रूप से तब, जब दाने किसी कपड़े या गहने के नीचे या केवल धूप के संपर्क में आए स्थानों पर हुए हों। हालांकि, ऐसे कई पदार्थ जो लोग अपने हाथों से छूते हैं, वे अनजाने में उनके चेहरे तक पहुंच जाते हैं, जहां चेहरे की अधिक संवेदनशील त्वचा प्रतिक्रिया कर सकती है, भले ही हाथों की त्वचा ऐसा न करें।
Photos courtesy of Thomas Ruenger, MD, PhD.
अगर डॉक्टर को कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस का संदेह हो और कारण का पता न चल पाए, तो एलर्जिक प्रतिक्रिया के लिए जिम्मेदार पदार्थ (एलर्जिन) की पहचान में मदद के लिए पैच टैस्टिंग की जा सकती है। इस टेस्ट के लिए, पीठ की त्वचा पर मानक कॉन्टेक्ट एलर्जिन से युक्त छोटे-छोटे पैच लगाकर 48 घंटों के लिए छोड़ दिए जाते हैं और फिर देखा जाता है कि उनमें से किसी के नीचे कोई दाना बना या नहीं। 48 घंटों के बाद उन्हें हटाया जाता है और डॉक्टर उनके नीचे की त्वचा का मूल्यांकन करते हैं। एक या दो दिन बाद त्वचा का दोबारा मूल्यांकन किया जाता है।
कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस का इलाज
समस्या पैदा करने वाले पदार्थ के संपर्क से बचना
खुजली से राहत के उपाय
कॉर्टिकोस्टेरॉइड और एंटीहिस्टामाइन
कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस का इलाज तब तक प्रभावी नहीं होता है, जब तक समस्या करने वाले पदार्थ से संपर्क रोक न दिया जाए। पदार्थ के हट जाने पर, आम तौर पर समय के साथ लालिमा चली जाती है। फफोलों से तरल रिसना और उन पर परत पड़ना जारी रह सकता है, लेकिन वे जल्द ही सूख जाते हैं। पपड़ी उतरना, खुजली और त्वचा का मोटा होना कई दिनों या सप्ताह तक जारी रह सकता है।
त्वचा पर लगाई जाने वाली या मुंह से ली जाने वाली कई दवाओं से खुजली और फफोलों में राहत मिल सकती है। साथ ही, डर्माटाईटिस से ग्रस्त छोटे-छोटे स्थानों पर ठंडे पानी या एल्युमिनियम एसिटेट (बुरो का घोल) में डूबे गॉज़ या पतले कपड़े के टुकड़े दिन में कई बार एक-एक घंटे के लिए लगाने से राहत मिलती है। पहले गीली रहने और फिर सूख जाने वाली ड्रेसिंग रिसते फफोलों में राहत देती हैं, त्वचा को सुखाती हैं और ददोरों के ठीक होने को बढ़ावा देती हैं।
अक्सर, प्रभावित त्वचा पर कोई कॉर्टिकोस्टेरॉइड लगाया जाता है। डॉक्टरी पर्चे के बिना मिलने वाली हाइड्रोकॉर्टिसोन से मदद मिल सकती है। अगर न मिले, तो डॉक्टर कोई अधिक तेज़ कॉर्टिकोस्टेरॉइड क्रीम लिख सकते हैं। अगर दाना बहुत अधिक तीव्र हो, तो मुंह से ली जाने वाली कोई कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवा ली जा सकती है।
एंटीहिस्टामाइन हाइड्रॉक्ज़ाइन और डाइफ़ेनिलहाइड्रामिन खुजली से राहत दे सकती हैं। इन्हें मुंह से लिया जाता है।
कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस का पूर्वानुमान
एलर्जिन से व्यक्ति का संपर्क खत्म होने के बाद एलर्जिक कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस को ठीक होने में कई सप्ताह लग सकते हैं। उत्तेजक कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस आम तौर पर जल्दी ठीक हो जाती है। व्यक्ति द्वारा किसी पदार्थ पर एक बार प्रतिक्रिया कर चुकने के बाद, वह आम तौर पर अपने पूरे जीवन उस पदार्थ के प्रति संवेदनशील बना रहता है।
फोटोएलर्जिक कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस से ग्रस्त लोगों में कई वर्षों तक, धूप के संपर्क में आने पर, इस रोग के भड़कने की घटनाएं होती रहती हैं (इसे स्थायी प्रकाश प्रतिक्रिया कहते हैं), लेकिन ऐसा बहुत ही कम मामलों में होता है।
कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस की रोकथाम
डर्माटाईटिस पैदा करने वाले पदार्थों के संपर्क से बचकर कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस की रोकथाम की जा सकती है। अगर संपर्क हो ही जाए, तो पदार्थ को तुरंत ही साबुन व पानी से धो डालना चाहिए। अगर लोग निरंतर संपर्क के जोखिम में हों, तो दस्तानों और सुरक्षा कपड़ों से मदद मिल सकती है।
फोटोटॉक्सिक या फोटोएलर्जिक कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस से ग्रस्त लोगों को धूप से बचना चाहिए।
बैरियर क्रीम भी उपलब्ध हैं जो कुछ पदार्थों, जैसे पॉइज़न आइवी और इपॉक्सी रेज़िन, को त्वचा से संपर्क करने से रोक सकती हैं।
डर्माटाईटिस पैदा करने वाले पदार्थ के इंजेक्शन या टैबलेट से विसंवेदीकरण (संवेदनशीलता खत्म करना), कॉन्टेक्ट डर्माटाईटिस की रोकथाम में प्रभावी नहीं होता है।



