दबाव के कारण छाले

(बेडसोर; डेक्यूबिटस अल्सर; दाब की वजह से अल्सर; दाब की वजह से चोट)

इनके द्वाराThe Manual's Editorial Staff
समीक्षा की गई/बदलाव किया गया संशोधित नव॰ २०२३
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प्रेशर घाव क्या होते हैं?

प्रेशर घाव या बेडसोर यानि दबाव से होने वाले घाव, त्वचा के किसी एक स्थान पर लगातार दबाव बने रहने से होने वाले घाव हैं। दबाव के कारण उस स्थान को जाने वाले रक्त का बहाव रुक जाता है, जिससे त्वचा को नुकसान हो सकता है।

  • प्रेशर घाव अधिकतर शरीर के हड्डी वाले भागों पर होते हैं, जैसे रीढ़ की हड्डी का निचला सिरा, कूल्हे, एड़ियां और कुहनियां

  • प्रेशर घाव ऐसे लोगों में आम हैं जो चल-फिर न सकने के कारण बिस्तर या चेयर में ही रहते हैं, जो सामान्य ढंग से चल-फिर नहीं सकते या जिन पर ऐसा प्लास्टर चढ़ा होता है या ऐसी खपच्ची बंधी होती है जो बहुत अधिक दबाव डालती है

  • स्थिति बदलते रहने से प्रेशर घाव की रोकथाम में मदद मिलती है

  • जो लोग खुद को हिला-डुला नहीं सकते उन्हें हर 1 से 2 घंटों पर अपनी स्थिति बदलवानी चाहिए

  • बार-बार स्थिति बदलकर और त्वचा को साफ़ व सूखी रखकर अधिकांश प्रेशर घाव की रोकथाम की जा सकती है

प्रेशर घाव क्यों होते हैं?

प्रेशर घाव होने के कारण:

  • त्वचा के किसी स्थान विशेष पर लगातार दबाव पड़ना, विशेष रूप से किसी हड्डी वाले स्थान के ऊपर की त्वचा पर

  • एक-दो घंटे से अधिक समय तक लगातार दबाव, जिससे त्वचा को जाने वाले रक्त का बहाव रुक जाता है

जो लोग जागे होते हैं और खुद को हिला-डुला सकते हैं वे बिना कुछ सोचे ही अपनी स्थिति लगातार बदलते रहते हैं। अगर लोग एकाध घंटे बाद भी अपनी स्थिति न बदलें, तो उनके शरीर का भार त्वचा के उस भाग को जाने वाले रक्त का बहाव रोक देता है जिस पर वे बैठे या लेटे होते हैं। दबाव जितने लंबे समय तक बना रहेगा, त्वचा को उतना ही अधिक नुकसान होगा।

प्रेशर घाव के आम स्थान

प्रेशर घाव का जोखिम किसे होता है?

प्रेशर घाव के जोखिम में ऐसे लोग होते हैं:

  • जो बेहोश, लकवाग्रस्त या डिमेंशिया से ग्रस्त होने के कारण अपनी स्थिति बदल नहीं सकते हैं

  • जो दर्द महसूस नहीं कर सकते हैं

  • जिन्हें ऐसा प्लास्टर चढ़ा होता है या ऐसी खपच्ची बंधी होती है जो किसी हड्डी के उभार पर दबाव डालती है, जैसे टखने की हड्डियों पर

  • जिनकी त्वचा नम रहती है, उदाहरण के लिए पसीने, मूत्र या मल (पॉटी) से गीली हो चुकीं शीट पर लेटे रहने की वजह से

  • जो ठीक से खाते-पीते नहीं हैं

प्रेशर घाव बहुत तेज़ी से बन सकते हैं, कभी-कभी तो मात्र कुछ घंटों के भीतर।

प्रेशर घाव के लक्षण क्या हैं?

प्रेशर घाव हल्के (स्टेज 1) से लेकर गंभीर (स्टेज 4) तक होते हैं। इलाज नहीं कराने पर ये घाव और गहरे होते जाते हैं।

  • शुरुआत में त्वचा लाल हो जाती है और दुखती है

  • उसके बाद त्वचा की ऊपरी परत में फफोले पड़ जाते हैं या वह उतर जाती है

  • आखिरकार घाव त्वचा में आर-पार हो जाता है और एक छेद (अल्सर) छोड़ जाता है

  • अल्सर खुला हो सकता है या मृत त्वचा की मोटी पपड़ी से ढका हो सकता है

अल्सर में संक्रमण हो सकता है। संक्रमित अल्सर के आस-पास का स्थान लाल होता है और उनमें से मवाद बह सकता है।

डॉक्टर कैसे पता करते हैं कि प्रेशर घाव है या नहीं?

जो लोग भ्रमित हैं या दर्द महसूस नहीं कर सकते उन्हें प्रेशर घाव के होने का पता नहीं चलता है। अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति की देखभाल कर रहे हैं जो जोखिम में है, तो आपको उसे करीब से देखना चाहिए, ताकि आप प्रेशर घाव के शुरुआती संकेतों को देख सकें।

डॉक्टर प्रेशर घाव को उसकी दिखावट से पहचानते हैं।

जब प्रेशर घाव ठीक नहीं होते, तो डॉक्टर निम्नलिखित के द्वारा संक्रमण की जांच कर सकते हैं:

  • MRI (मैग्नेटिक रीसोनेंस इमेजिंग) करना

  • कभी-कभी, ऊतक का एक छोटा-सा टुकड़ा लेकर उसे लैब टैस्ट के लिए भेजना

डॉक्टर प्रेशर घाव का इलाज कैसे करते हैं?

डॉक्टर:

  • स्टेराइल सलाइन (नमकीन पानी) से घावों को साफ़ करें

  • कैंची और छुरी की मदद से मृत ऊतक हटाएंगे

  • घावों को सुरक्षा देने और ठीक होने में मदद देने के लिए उन्हें विशेष बैंडेज से ढकेंगे

  • कभी-कभी, बड़े प्रेशर घाव बंद करने के लिए सर्जरी करेंगे

घावों को ठीक होने तथा और घाव होने से रोकने में मदद देने के लिए डॉक्टर निम्नलिखित भी करेंगे:

  • यह सुनिश्चित करना कि व्यक्ति अधिक बार शरीर की स्थिति बदले

  • व्यक्ति के शरीर की स्थिति कब-कब बदलनी है इस बारे में देखभालकर्ताओं के लिए एक लिखित समय-सारणी बनाना

  • शरीर के किसी एक भाग पर बहुत अधिक दबाव न पड़े यह सुनिश्चित करने के लिए पैड और तकिये जैसे साधनों का इस्तेमाल करना

  • अधिक सेहतमंद आहार के सुझाव देना

प्रेशर घाव की रोकथाम कैसे की जा सकती है?

डॉक्टर प्रेशर घाव की रोकथाम की कोशिश करते हैं, क्योंकि उनका इलाज कठिन होता है।

जो व्यक्ति बिस्तर या चेयर से बंधा है उसके मामले में देखभालकर्ताओं को:

  • रोज़ाना त्वचा को ध्यान से देखना चाहिए

  • हर 1 से 2 घंटों पर व्यक्ति की स्थिति समायोजित करनी चाहिए

  • त्वचा को सूखा और साफ़ रखना चाहिए

  • दबाव वाले स्थानों पर त्वचा को ध्यान से जांचना चाहिए कि कहीं वहां लालिमा या रंग में दूसरे बदलाव तो नहीं हुए हैं

  • शीट गीली होते ही जल्द-से-जल्द उन्हें बदल देना चाहिए

  • शरीर के भागों को सुरक्षा कवरिंग या तकियों से सहारा देना चाहिए

  • कभी-कभी, दबाव से राहत देने वाले विशेष गद्दे या व्हीलचेयर कुशन का इस्तेमाल करना चाहिए

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